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ज्ञान मोति(३)

 ज्ञान मोति(३) मुरली के गहरे सार पर चर्चा करेंगे, जिसमें दो दिव्य स्मृतियों (मान्यताओं) का उल्लेख है। इन्हें जीवन में धारण करने से हम न केवल वर्तमान में स्व-परिवर्तन करेंगे, बल्कि भविष्य में विश्व के लिए पूजनीय और महिमा योग्य बन जाएंगे। ​दो मुख्य दिव्य स्मृतियाँ: • महान आत्मा: बुद्धि में सदा यह गौरवपूर्ण चिंतन रहे कि "मैं एक महान आत्मा हूँ। मेरा हर संकल्प, बोल और कर्म महानता से भरपूर है क्योंकि मैं स्वयं महान विधाता की रचना हूँ। • ​मेहमान (Guest): स्वयं को इस पुरानी कलियुगी सृष्टि और विनाशी देह में मात्र एक 'मेहमान' समझें। मेहमान कभी भी पराई चीज़ों में आसक्त नहीं होता, वह सदा उपराम रहता है। ​इन स्मृतियों के अलौकिक लाभ: • ​इन दोनों स्मृतियों को बनाए रखने से माया के विघ्न और स्वभाव-संस्कार की पुरानी कमी-कमजोरियाँ स्वतः समाप्तहो जाती हैं। • ​आपकी अवस्था 'उपराम'(Detached) हो जाएगी, जिससे आप देह-भान से मुक्त होकर आत्मिक सुख का अनुभव करेंगे। • ​आप यह अनुभव करेंगे कि यह शरीर मेरा नहीं है, बल्कि शिव बाबा को अर्पण किया हुआ एक 'ईश्वरीय अमानत' है। यह कर्म करने के लिए ...