​ज्ञान मोती (भाग 2):

स्व-परिवर्तन का आधार

​आज की ज्ञान मोती (2)श्रृंखला मुरली शिक्षाओं के आधार पर आत्म-मूल्यांकन पर केंद्रित है। यह हमें सर्वगुण संपन्न, १६ कला संपूर्ण, मर्यादा पुरुषोत्तम और पूर्णतः अहिंसक बनने की दिशा में अपनी प्रगति की जाँच करने के लिए प्रेरित करती है।

​मुख्य बिंदु:

• ​चतुर्मुखी जाँच: स्वयं को परखें कि क्या आप वास्तव में सर्वगुण संपन्न और १६ कला संपूर्ण बन चुके हैं? क्या आप ईश्वरीय नियमों का सख्ती से पालन कर रहे हैं और मन, वचन तथा कर्म से पूर्णतः अहिंसक हैं?

• ​स्थिति और परिस्थिति:यद्यपि हर कोई देवी-देवता बनेगा, लेकिन भविष्य का पद आपके वर्तमान पुरुषार्थ पर निर्भर करता है। जाँचें कि आप माया (विघ्नों) से अधिक प्रभावित हैं या अपनी ऊंची स्थिति में स्थित हैं।

• ​विश्व परिवर्तन का आधार:आप इस पुरानी दुनिया के परिवर्तन के लिए जिम्मेदार आधारमूर्त आत्माएं हैं। दुनिया देख रही है कि अंत कब आएगा। परिवर्तन के समय को लेकर कभी भी हलचल (भ्रम) में न रहें।

• ​अचल और अडोल: हमेशा अपनी 'आधारमूर्त' भूमिका को याद रखें और हर परिस्थिति में अचल और स्थिर रहें।




Comments

Popular posts from this blog

SEVENDAYS COURSE ON GODLY KNOWLEDGE-LESSON 1-WHO AM I

ରାଜଯୋଗ---- ବ୍ରହ୍ମାକୁମାର ଡ଼ା: ସୁଧାଂଶୁ ଶେଖର ମିଶ୍ର

ଶ୍ରୀମଦ୍ଭଗବତ୍ ଗୀତା ରହସ୍ୟ--ପ୍ରଥମ ଖଣ୍ଡ-ଦ୍ୱିତୀୟ ଅଧ୍ୟାୟ ଡାକ୍ତର ସୁଧାଂଶୁ ଶେଖର ମିଶ୍ର